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Friday, February 28, 2020

Powerful Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt

1) Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debts

We have mentioned two diffierent Hadiths about Debts, if you read both hadiths about Debts, here S.A.W (PBUH) mentioned Dua to PAY OFF DEBTS & Anxieties, worries about Debts. So those who believe in S.A.W (PBUH) cannot deny these powerful dua (Wazifa) for Debts relief.
Inshaallah follow these Dua to clear your debts and get rid out of Debts.
Ameen!!!
Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt
Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt 

Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt ( hindi)

हज़रत अबू वाइल रह. फरमाते हैं की एक मुकातब (गुलाम ) ने हज़रत अली रजीअल्लाहु अन्हु की खिदमत में हाजिर होकर अर्ज किया : मैं (किताबत के बदले में) तयशुदा माल अदा नहीं कर पा रहा। आप इस बारे में मेरी मदद फरमाइए।  हजरत अली  रजीअल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया : क्या मै तुम्हें वह कलिमे न सीखा दूं जो मुझे रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिखाये थे? अगर तुम पर (यमन के) सीर पहाड़ के बराबर भी कर्ज हो तो भी अल्लाह तआला उस कर्ज को अदा करा देंगे।  तुम यह दुआ पढ़ा करो : "या अल्लाह ! मुझे अपना हलाल रिज्क़ देकर हराम से बच लीजिए  और मुझे अपने फ़ज़्ल व करम  से अपने गैर से बेनियाज़ कर दीजिए "
                                                                                                                                             (तिर्मिज़ी )

फायदा: मुकातब उस गुलाम को कहते हैं जिसे उसके आका ने कहा हो की अगर तुम इतना माल इतने अर्से में अदा  कर दोगे तो तुम आज़ाद हो जाओगे, जो माल उस मामले में तय किया जाता है उसको किताबत का बदल कहते हैं।

2) Hadith about Debt & Anxieties

Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt
Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt 

Dua to PAY OFF DEBTS-Hadith about Debt &Anxieties (Hindi)

हजरत अबू सईद खुदरी रजीअल्लाहु अन्हु रिवायत करते है कि  एक दिन रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम मस्जिद में तशरीफ़ लाए तो आप की नज़र एक अंसारी शख़्स पर पड़ी जिसका नाम अबू उमामा था।  आप रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया : अबू उमामा ! क्या बात हे मैं तुम्हे नमाज के वक़्त के अलावा मस्जिद में (अलग-थलग) बैठ हुआ  हूं? हजरत अबू उमामा  ने अर्ज किया : या रसूलुल्लाह ! मुझे गमों  और कर्जों ने घेर रखा है।  आप रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया : क्या मैं तुम्हे एक दुआ न सीखा दू जब तुम उसको कहोगे तो अल्लाह तआला तुम्हारे गम दूर कर देंगे और तुम्हारा कर्ज उतरवा देंगे ?
हजरत उमामा  ने अर्ज किया : या रसूलुल्लाह ! जरूर सीखा दें! आप रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : सुबह व शाम यह दुआ पढ़ा करो : "अल्लहुम-म  इन्नी अअजु बि-क मिनल हम्मि वल ह-जन व अअजु बि-क मिनल अज्जि वल कस्लि व अअजु बिक मिनल जुबिन वल बुख़्ल व अअजु बि-क मिनल गलबति दैनि व कहिरर्रिजाल। 

तर्जुमा : "या अल्लाह ! मैं फ़िक्र व गम से आपकी पनाह  लेता हूँ, और मैं बेबसी और सुस्ती से आपकी पनाह लेता हूँ और मैं कंजूसी और बुजदिली से आपकी पनाह लेता हूँ, और मैं कर्ज के बोझ से  दबने से और लोगों के मेरे ऊपर दबाव से आपकी पनाह लेता हूँ।  हजरत उमामा रजीअल्लाहु अन्हु फरमाते हैं , मैंने सुबह व शाम इस दुआ को पढ़ा, तो अल्लाह तआला में मेरे गम दूर दिए और मेरा सारा कर्जा भी अदा करवा दिया।
                                                                                                                                 (अबु दाऊद ) 

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